अपने मालिक के इंतजार मे Tapovan Tunnel के बाहर तीन दिन से बैठा है यह ‘वफादार’

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से आई जल प्रलय से भारी तबाही हुई है। इसमें करीब 37 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग लापता हैं। जिनकी तलाश लगातार जारी है। साथ ही तपोवन टनल में बचाव कार्य लगातार युद्धस्तर पर चल रहा है।

पिछले 7 दिनों से बचाव कर्मी दिन-रात बचाव कार्य में लगे हुए हैं। तपोवन टनल में बचाव कार्य बहुत मुश्किल रहा। टनल में मलवा भरा हुआ है। इसी बीच यहां एक अजीब नजारा देखने को मिला। एक कुत्ता करीब 5 दिनों से टनल के पास ही बैठा है मानों किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उसको कई बार भगाया भी गया लेकिन वह हर बार वापस आकर वही बैठ जाता है।

एक मीडिया रिपोर्ट (Times Now) की मानें तो यह कुत्ता तपोवन हाइडल प्रोजेक्ट साइट के पास बैठकर आपदा के कारण टनल में फंसे अपने मालिक का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। बहुत कोशिश करने के बाद भी वह अपने मालिक को ढूंढ नहीं पाया। अब कुत्ता टनल के पास यह उम्मीद लगाए बैठा है कि उसका मालिक कब सुरंग से बाहर आएगा। लेकिन अभी तक उसे निराशा ही हाथ लगी है।

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कैसी है रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति?

तपोवन सुरंग में फंसे 25 से 30 लोगों को ढूंढने में गाद के कारण बचाव अभियान में आ रही दिक्कतों के बाद बचाव दलों ने गुरुवार को बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इस ऑपरेशन में उत्तराखंड पुलिस के साथ एसडीआरएफ की 8 टीमें लगी हुई हैं। सेना, एनडीआरएफ, आइटीबीपी और एसडीआरएफ द्वारा लगातार चलाए जा रहे बचाव और तलाश अभियान में पांचवे दिन सुरंग में फंसे लोगों को ढूंढने के लिए रिमोट सेंसिंग से लेकर ड्रिलिंग तक हर तकनीक अपनाई जा रही है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि थोड़ा समय लगेगा लेकिन पूरा प्रयास किया जा रहा है जल्द सफलता मिलेगी।

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कैसे आई चमोली आपदा?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसरो के वैज्ञानिकों के हवाले से जानकारी दी थी कि 7 फरवरी को उत्तराखंड में जो आपदा आई वह ग्लेशियर टूटने से नहीं बल्कि एक ट्रिगर प्वाइंट से लाखों मीट्रिक टन बर्फ एक साथ फिसलने से आई थी। इसरो ने भी बताया कि तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि वहां पर कोई ग्लेशियर नहीं था वहां पर सिर्फ पहाड़ ही दिखाई दे रहा था।

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