Tuesday, February 7, 2023
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बिहार के रेल पुलिस राम बहादुर की मूंछ पर फिदा हो गई थी अंग्रेजी मेम, बोली मेरे साथ इंग्लैंड चलो!

आपने बहुत चर्चित हिंदी फिल्म में नत्थू लाल कि मुझे तो देखी होगी साथ ही उस फिल्म में यह कहावत कही गई कि अगर मूछें हो तो नत्थू लाल की जैसी हो ना हो तो ना हो। हम बात कर रहे हैं भागलपुर रेल थाने में तैनात गृह रक्षक राम बहादुर चौधरी की। जो पिछले 18 सालों से मूंछ रखे हुए हैं और मूंछ की लंबाई 3.6 फिट है। कई सालों से राम बहादुर चौधरी अपने मूँछ का रखरखाव कर रहे हैं। इनकी मूँछ के बदौलत ही इन्हें लोग मूछ वाले चौधरी बाबू कहते हैं।

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राम बहादुर चौधरी अपने मूंछ को शान से दोनों हाथों से लंबी तान कर दिखाते हैं। एक समय की बात है जब श्याम बहादुर चौधरी की मूँछ पर मार्गरेट Kith नामक अंग्रेजी Ladies फिदा हो गई थी। उन्होंने राम बहादुर चौधरी को अपने साथ ले जाने की जिद पकड़ ली थी तब अंग्रेजी Mam ने कहा मिस्टर चौधरी मेरे साथ इंग्लैंड चलो हम तुम्हें बर्मिंघम पैलेस घुमाएंगे टेम्स नदी दिखाएंगे।

लेकिन राम बहादुर चौधरी ने अंग्रेजी मेम का प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा कि हम संग्रामपुर के रामपुर कहुआ गांव के रहते हैं। हम खेती-बाड़ी कर लेंगे पर प्रदेश नहीं जाएंगे। आपको बता दें कि अंग्रेजी Mam बिहार के योग नगरी मुंगेर से भागलपुर आई थी निराश होकर हुआ कोलकाता होते वापस अपने देश इंग्लैंड चली गई।

मूंछ सवारने में गजब की दीवानगी

राम बहादुर चौधरी अपने मूछों को शान से तानते हैं लेकिन इसके लिए वह अपने मूछों में रोज शैंपू और तेल लगाते हैं। सवेरे उठने के बाद चौधरी जी तीन कंगी के साथ आधे घंटे मूँछ सवारने में लगाते हैं। मोटी दांत वाली कंगी से मूँछ को सुलझा लेते हैं। पतली दांत वाली कंगी से लंबी तानते हैं फिर वहीं कंगी से उसे करीने से मोड़ लेते हैं। शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल मूछों के लिए दिन में करते हैं और रात में सोने से पहले मूछों में तेल लगाना नहीं भूलते। चौधरी साहब कहते हैं कि यह मूछ मेरे शान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुझे गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने का कोई शौक नहीं है लेकिन अपने मुझ पर रोज एक दो बार हाथ शान से फेर लेते हैं तों सुख मिलता है।

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भागलपुर में है तैनाती

आपको बता दें कि राम बहादुर चौधरी मुंगेर जिला के रामपुर कहुआ संग्रामपुर के निवासी हैं। फिलहाल उनकी पोस्टिंग जीआरपी थाना भागलपुर में गृह रक्षक के रूप में है इसके पहले वह नवादा में सेवा दे रहे थे। उन्होंने अपने बचपन का किस्सा बताते हुए कहा कि जब मैं 18 साल का था तब मेरे एक दोस्त ने अपने नाखून को बढ़ाकर लंबा कर लिया था वह किसी को छूने नहीं देता था उस पर नेल पॉलिश लगाकर रखता था। तभी मैंने भी फैसला किया कि शान की प्रतीक कहे जाने वाले मूँछों को लंबा करके दिखाएंगे फिर उन्होंने ठान लिया और जिद पूरी पूरा करके ही दिखाया। एक समय ऐसा था जब उनके टोले मोहल्ले के लोग सही से नहीं जानते थे अब वह पहचान के मोहताज नहीं हैं और शान से अपनी मूंछों को लहराते हैं।

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