ऐसा विरले ही होता है की आप अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद भी उसे छोड़ देते हैं। हालांकि इसका कुछ भी हो सकता है,लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं देखा जाता। दुनिया में हर इंसान का कुछ सपना होता है। वो उस सपने तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत और सालों की प्रतीक्षा करता है। मंजिल पाते ही वो व्यक्ति सातवे आसमान पर होता है। और अपनी बाकी की जिंदगी के लिए निश्चिंत हो जाता है। लेकिन कुछ लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं एक ऐसी ही महिला के बारे में जिन्होंने तरक्की की ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद अपना रास्ता मोड़ लिया। और प्रोफेसर से बन गई आईपीएस अफसर।
कौन है आईपीएस नेहा यादव?

नेहा यादव का जन्म पश्चिमी दिल्ली में हुआ था। उनके पिता पेशे से शिक्षक थे वहीं मां एक गृहणी। नेहा को उनके पिता के पेशे से इस कदर प्यार जो गया था कि वो भी उसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहती थी। नेहा ने अपनी स्कूली पढ़ाई पश्चिमी दिल्ली से ही पूरी कर ली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय जेएनयू से आगे की पढ़ाई की। यहां से उन्होंने इकोनॉमिक्स में डिग्री ली। इसके बाद उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी मिल गई।
भ्रष्टाचार का किया सामना ,तो जग गया आईपीएस अफ़सर बनने का जुनून
नेहा और उनके घरवालों को प्रोफेसर की नौकरी से काफी खुशी थी। सभी को नेहा की इस उपलब्धि पर गर्व था। लेकिन एक दिन नेहा को भ्रष्टाचार का सामना यूनिवर्सिटी में ही करना पड़ गया। इसी वजह से उन्होंने अपनी 2 साल की प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी। और उन्होंने तय किया कि वो अब पुलिस अधिकारी बनेंगी। इसके लिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी।
पिता थे पुलिस अधिकारी बनने के खिलाफ

जब नेहा के पिता को ये बात पता चली कि उनकी बेटी पुलिस अधिकारी बनना चाहती हैं, तो वो नाराज़ ही गए। उस वक्त नेहा की मां ने उनका साथ दिया। इसके बाद नेहा ने यूपीएससी के लिए दिन रात मेहनत करनी शुरू कर दी।
साल 2015 में पाई सफलता, पद संभाला तो कम हो गया क्राइम रेट
नेहा ने साल 2015 में यूपीएससी परीक्षा क्रैक की। इसके बाद उनके पिता की नाराज़गी भी खत्म हो गई। उन्हें आईपीएस अधिकारी के तौर पर चयनित किया गया। नेहा की पहली पोस्टिंग मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में हुई। कुछ सालों बाद वो चंडीगढ़ की पोस्टिंग संभालने लगीं। चंडीगढ़ के दक्षिण क्षेत्र में उस वक्त क्राइम रेट काफी ज्यादा था। जब नेहा ने वहां का एसएसपी पद संभाला तो क्राइम रेट में गिरावट नजर आई।















