लोगों की आज भी एक गलत धारणा है कि अगर किसी का माता-पिता अनपढ़ हो तो उनके बच्चे भी अनपढ़ रहेंगे लेकिन यह धारणा बहुत पुरानी हो चुकी है। मेरठ की रहने वाली लता ने इसे गलत साबित किया है। लता की मां अनपढ़ थी लेकिन अपनी बेटी के सपनों के लिए उन्होंने उन्हें पंख दिया। लता पहले पोस्ट आफिस में कलर्क थीं, फिर 2019 में पीसीएस परीक्षा पास कर डिप्टी जेलर बनीं और अब 2020 पीसीएस की परीक्षा में सफल हुई हैं और डीआइओएस बनेंगी। आपको बता दें कि लता की शादी 2018 में ही हो गई थी, इसके बावजूद इनका हौसला जरा भी कम नहीं हुआ। उनके लक्ष्य तक पहुंचने में उनके पति आकाश में उनका बखूबी साथ दिया। अपनी सफलता का श्रेय लता अपनी मां को भी देती है।
आपको बता दें कि लता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए उन्होंने 12वीं के बाद पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी की थी। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने पढ़ाई पढ़ाई भी जारी रखा. लता ने प्राइवेट BA किया इसके बाद इग्नू से MA किया है। 2015 में लता ने पीसीएस की परीक्षा दी पहले ही प्रयास में वो इंटरव्यू राउंड तक पहुंचने में कामयाब रही। लेकिन फाइनल में उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया . 2016 में उन्होंने दूसरा अटेंड दिया इस बीच वह पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी कर रही थी। इस बार वह प्रारंभिक परीक्षा भी क्रैक नहीं कर पाई। इसी बीच उनकी शादी 2018 में आकाश से हो गई।
पीसीएस 2019 में बनी थी डिप्टी जेलर
लता ने बताया कि उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में उनके पति आकाश ने हर तरह का सहयोग किया है। लता ने 2019 में पीसीएस परीक्षा पास की थी उस वक्त उन्हें डिप्टी जेलर का पद मिला था। पीसीएस 2020 में भी उन्होंने परीक्षा पास की इस बार उन्हें डीआइओएस का पद मिला है। लता ने बताया कि कहा जाता है हर कामयाबी के पीछे एक औरत का हाथ होता है लेकिन मेरी सफलता के पीछे मेरे पति का हाथ है।
खुद पर भरोसे और धैर्य से मिली सफलता
आमतौर पर लोगों की शादी हो जाने के बाद वह परिवार में बंध जाती हैं उनका एक सीमित दायरा होता है। लेकिन लता ने अटल विश्वास बनाए रखा उसी का नतीजा है कि कई बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। यही वजह है कि आज वह डिप्टी जेलर से डीआईओएस बनने जा रही हैं। लता की कहानी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।