Tuesday, February 7, 2023
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पति के बीमार पड़ने पर खुद उठाया खेती का जिम्मा और किसान चाची से हुई मशहूर

जिन्हें कभी दो वक्त की रोटी बड़े ही मुश्किल से नसीब हो पाती थी आज उसी राजकुमारी देवी को “किसान चाची” के नाम से जाना जाता है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाली राजकुमारी को दुनिया आज किसान चाची के नाम से जानती है. गांव में मिलो-मिल साइकिल चलाकर किसानों के बीच क्रांति जगाने वाले राजकुमारी देवी आज हजारों महिलाओं को प्रेरित कर रही है गांव की एक आम महिला से किसान चाची तक नाम बनाने का सफर काफी संघर्ष से भरा हुआ है.

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आमतौर पर ऐसा देखने को मिलता है कि किसानी क्षेत्रों में पुरुषों का वर्चस्व रहा है. महिलाएं खेती बाड़ी का काम नहीं संभालती है. लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के आनंदपुर गांव की रहने वाली 63 वर्षीय राजकुमारी देवी किसानी क्षेत्र में ना केवल पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है बल्कि उनकी मांग एक मोटिवेटर के रूप में होने लगी है क्योंकि राजकुमारी देवी अब किसानी चाची के भी नाम से जानी जाती है. राजकुमारी देवी गांव-गांव में जाकर ना केवल महिलाओं को खेती के बारे में बता रही है बल्कि महिलाओं का सशक्तीकरण का भी पाठ भी पढ़ा रही है.

राजकुमारी देवी बनी किसान चाची

मुजफ्फरपुर जिले के सरैया गांव के रहने वाले 63 वर्षीय राजकुमारी देवी को पदम श्री पुरस्कार देने की घोषणा के बाद अब इनकी पहचान देश भर में होने लगी है. मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि की उन्नत तकनीकी कुशल परख रखने वाली राजकुमारी देवी आज सफल खेती का दूसरा नाम बन चुकी है.

राजकुमारी देवी कहती है “मैं अक्सर देखती थी कि महिलाएं सिर्फ खेत में मजदूरी करते हुए ही नजर आती है उन्हें किसी प्रकार का खेती की तकनीकी ज्ञान नहीं हुआ करता था.” महिलाएं सिर्फ पुरुषों के बताए अनुसार ही काम करती थी जब महिलाएं भी खेत में मेहनत करती ही है तो क्यों ना बेहतर खेती की तकनीक जाने और मेहनत करें. मैंने तय किया कि मैं पहले खुद खेती की तकनीक के बारे में जानकारी लूंगी और साथ ही दूसरी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करूंगी.

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राजकुमारी देवी उर्फ किसान चाची का जन्म एक शिक्षक के घर में हुआ था उस समय कम उम्र में ही शादी हो जाती थी इसलिए मैट्रिक पास होते ही 1974 में राजकुमारी देवी की शादी एक किसान परिवार में अवधेश कुमार चौधरी से कर दी गई. शादी के बाद वह मुजफ्फरपुर जिले के आनंदपुर गांव में अपने परिवार के साथ रहने लगी राजकुमारी देवी शिक्षिका बनना चाहती थी लेकिन परिवार वाले इनके खिलाफ थे इसलिए वह ऐसा नहीं कर सकी.

“किसान श्री” से सम्मानित

आर्थिक तंगी और पति की बेरोजगारी के कारण राजकुमारी देवी ने खेती को ही अपना सहारा बनाया. सन 2006-06 में बिहार सरकार ने राजकुमारी देवी को “किसान श्री” से सम्मानित किया. राजकुमारी देवी को सरैया कृषि विज्ञान केंद्र की सलाहकार समिति के सदस्य बनाई गई उनकी सफलता की कहानी पर केंद्र सरकार के कृषि विभाग द्वारा वृत्तचित्र का भी निर्माण कराया गया. टीवी चैनल के सबसे बड़े शो कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन भी किसान चाची की लगन और मेहनत के कायल हो चुके हैं.

राजकुमारी देवी उर्फ किसान चाची का कहना है “आज के दौर में घरेलू उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा देना और निर्यात प्रोत्साहन आदि की दिशा में दिशा में सरकार अवसर अवसर प्रदान करें.” गांव के हर घर में महिलाओं द्वारा निर्मित मुरब्बा, अचार के लिए बाजार उपलब्ध हो. 63 वर्षीय राजकुमारी देवी आज भी दिनभर 30 से 40 किलोमीटर साइकिल चलाती है और गांव-गांव घूमकर किसानों के बीच मुफ्त में अपने अनुभव एवं कृषि की तकनीक की जानकारी बांटती है.

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