भारत की प्रथम ट्रांसजेंडर जज बन जोइता मंडल ने तोड़ा मिथक,बनी ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए प्रेरणा

बस, ट्रेन या फिर रेलवे स्टेशन अक्सर आपने यहां किन्नर या हिजड़ा इन लोगों को जरूर देखा होगा. या फिर उनकी आवाजे आपने सुनी होगी. समाज का एक बड़ा तबका आज भी किन्नर को एक अलग नजरिए से देखता है कुछ उनके मजाक उड़ाते हैं तो कुछ इस किन्नर समाज को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं. भारत में सबके लिए कानून और सबके लिए कानून एक समान है. सबको इज्जत से जीने का अधिकार है पर किन्नरों को अलग ही नजरिए से देखा जाता है हालांकि आए दिनों किन्नर समाज हर क्षेत्र में धीरे-धीरे ही सही पर आगे बढ़ रहे हैं.

हम बात कर रहे हैं भारत की प्रथम ट्रांसजेंडर जज जोइता मंडल की. जिन्होंने कभी फुटपाथ पर रात बिताए थे. जोइता मंडल पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और वह एक किन्नर है. इन्होंने अपने हुनर से उन सभी लोगों को करारा जवाब दिया है जो किन्नर समाज को एक अलग नजरिए से देखते हैं. जोइता पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में लोक अदालत की जज हैं. जोइता के जज बनने का सफर कांटो भरा था हालांकि उन्होंने सफलता पाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई.

जोइता को बचपन से ही लड़कियों की तरह कपड़े पहनने उनकी तरह चलने का शौक था. लेकिन उनके घर वालों को यह अच्छा नहीं लगा उनके परिवार एक समाज में रहता है इसलिए उनको घर से निकाल दिया. जोइता ने बताया कि जब घर से निकाला गया तो उन्हें रात में फुटपाथ पर सोना पड़ता था. क्योंकि लोग किन्नर होने के कारण होटल में कमरा तक नहीं दिया करते थे. वह जब भी खाना लेने जाती थी तो लोग उनसे कहते थे कि हमें दुआएं दो. उन्होंने बताया कि जब मैं कॉलेज जाति थी तो लोग मेरा मजाक उड़ाते उड़ाते थे. इसके कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी उन्होंने बताया कि पेट भरने और गुजारा करने के लिए वह भीख मांग कर तो कभी नाच कर पैसे कमाती थी.

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2014 के फैसले ने बढ़ाया हौसला

एक इंटरव्यू के दौरान जोइता ने बताया कि जब वह अपना पहचान पत्र बनवाने गई तो वहां पर कहा गया कि तुम मत जाओ. तुम जैसे लोग नहीं जाते इस बात ने जोइता को अंदर से झकझोर दिया. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी वह संघर्ष करती रही. लेकिन कुछ दिन बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ट्रांसजेंडर के हित में एक फैसला आया और इस फैसले से जोइता और मजबूत बन जाती है. इसके बाद जोइता ने अपना पहचान पत्र बनवाया और अपने जिले में वह पहली ट्रांसजेंडर थी. जिन्होंने अपना पहचान पत्र बनवाया. आपको बता दें कि जोइता एक जज के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं.

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