Monday, February 6, 2023
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14 साल मे बिहार के लाल ने बनाया था ‘खाना बनाने वाला रोबोट’, डॉ. कलाम ने ऐसे बदल दी थी किस्मत

बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया के रहने वाले अभिषेक भगत ने एक रोबोट बनाया है। यह रोबोट कुछ अलग किसम का है। इस रोबोट को ऑर्डर देने की सिर्फ जरूरत है और आपका मनपसंद खाना बनकर तैयार हो जाएगा। यह एक ऐसा कुकर है जिसमें आप कई तरह की रेसिपी बना सकते हैं जैसे चाय, नाश्ता से लेकर खीर, वेज बिरयानी और सेवई तक भी बना सकते हैं।

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खेल-खेल में हुई थी शुरुआत

जब वह केवल 14 साल के थे तभी इन्होंने अपने रोबोकुक का डिजाइन 2006 में बना लिया था। 27 साल के अभिषेक बताते हैं कि मैं पढ़ाई में अच्छा नहीं था चौथी कक्षा आने तक मैं कई बार फेल हुआ। फेल होने की वजह से मुझे स्कूल से निकाल दिया गया था इसकी एक बड़ी वजह थी कि मैंने मार्केट में मिलने वाले पटाखे से एक टाइम बम बना दिया था। इसमें अलार्म सेट था और नियत समय पर पटाखा अपने आप फट जाता था।

उन्होंने आगे बताया कि यह सब देखने के बाद लोग मुझे लादेन बुलाने लगे और मुझे स्कूल से निकाल दिया गया। ऐसी हरकतों से मेरे घर वाले भी बहुत परेशान थे। लेकिन एक रिश्तेदार की सलाह पर मुझे पढ़ाई के लिए पटना के 1 बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। अभिषेक ने कहा कि मैं हमेशा अपने माता-पिता के लिए चाय बनाता था लेकिन मुझे कुछ ऐसी प्रेरणा मिली कि जिस से ज्यादा मेहनत की जरूरत ना हो और खुद ब खुद बन जाए।

अभिषेक ने बताया कि जब वह छोटे थे तभी उन्हें चाय बनाने को कहा जाता था और एक ही काम उन्हें हर रोज बार-बार करना पड़ता था। इससे उन्हें जिज्ञासा हुई की बर्तन में सही समय पर अपने आप चीनी और चाय पत्ती गिर जाये और मुझे इसके लिए खड़ा भी रहना ना पड़े। अभिषेक आठवीं क्लास में पढ़ते थे तभी उन्होंने एक बॉक्स बनाया इस बॉक्स के नीचे ढक्कन लगा था।

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इसके बॉल पर उन्होंने इलेक्ट्रोमैग्नेट और ढक्कन पर एक परमानेंट मैग्नेट लगा दिया। इसकी खूबियां थी कि इसमें जब करंट नहीं जाता था तो दोनों चिपके रहते थे लेकिन करंट देते दोनों अलग हो जाते थे। अभिषेक ने इसमें टाइमिंग सेट कर दिया और चार अलार्म सेट किए थे। जिससे कि बर्तन में चाय, चीनी और दूध सही समय पर गिर जाते थे।

एपीजे अब्दुल कलाम को चिट्ठी

अभिषेक ने बताया कि वह इस इनोवेशन को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनके घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी और स्कूल में सिलेबस को कोई आगे पढ़ना नहीं चाहता था। ऐसे में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को चिट्ठी लिखी इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि अभिषेक की जिंदगी ही बदल गई।

अभिषेक ने कहा साल 2006 में मैं अपने Out-of-the-box के इनोवेशन को बढ़ाना चाहता था तभी मुझे राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सर को चिट्ठी लिखने का विचार आया। क्योंकि मैंने सुना था कि वह बच्चों को बहुत मानते हैं उन्होंने बताया कि इसके बाद मैंने यूं ही बस अपने पिताजी से पूछा कि राष्ट्रपति कलाम सर कहां रहते हैं। तो मेरे पिता ने बताया वह दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में रहते हैं। इसके बाद मैंने बिना किसी टिकट के उन्हें एक चिट्ठी लिख दी मुझे लगा कि इसका कोई जवाब नहीं आएगा लेकिन कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति भवन से मेरे लिए एक चिट्ठी आई और यहां से मेरी जिंदगी ही बदल गई।

इस चिट्ठी में अपनी योजनाओं को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन भेजने के लिए कहा गया था और लिखा था ‘प्रिय श्री अभिषेक भगत भारत के राष्ट्रपति जी को प्रेषित आपके पत्र के लिए धनबाद l! राष्ट्रपति जी आपको अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं आप अपनी योजना के विस्तृत विस्तार जानकारी राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान, सेटेलाइट कांपलेक्स, प्रेमचंद्र नगर, जोधपुर, टेकरा सेटेलाइट, अहमदाबाद 380015, गुजरात को भेजें।

इसके बाद अभिषेक ने ठीक वैसा ही किया लेकिन कई महीनों तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला जिसे देखकर Abhishek काफी निराश भी हुए। करीब 2 सालों बाद उनके फोन की घंटी बजी इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर ही नहीं देखा। अभिषेक ने बताया कि मुझे कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन करीब 2 सालों के बाद मुझे NIF से फोन आया।

इस दौरान मुझसे पूछा गया कि क्या मैं कुकिंग मशीन बना सकता हूं मैंने कहा मैं इसे जरूर बना लूंगा लेकिन इसके लिए मुझे मदद की जरूरत होगी। इसके बाद मुझे वहां इग्नाइट अवार्ड समारोह में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया जहां मैंने अपनी आंखों के सामने कलाम सर को देखकर ठान लिया कि अगले साल इस पुरस्कार को मैं ही जीतूंगा। आखिरकार अभिषेक को एक अनोखा रोबोटिक कुकर बनाने के लिए एनआईए द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

क्या खास था कुकर में

अभिषेक द्वारा बनाए गए इस कुकर में खास बात है क्या? दरअसल, अभिषेक ने कहा कि जब भी मेरी माँ खाना बनाती थी तो मैं उसे बारीकी से देखता था मैं देखता था की मां किस समय खाना बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल कर रही है और इसमें कितना समय लगता है। मैंने उसी टाइमिंग को घड़ी में प्रोग्राम कर दिया। इसमें 9 बॉक्स होते हैं। जिसमें लिखा होता है कि किस में क्या सामग्री डालने हैं। इस रोबोटिक कुकर में बना खाने बिल्कुल हाथ के बन्ना खाने जैसा होता है। इस कुकर का सबसे बड़ा फायदा है कि इसमें खाना पकाने के लिए आपको घंटों तक खड़ा नहीं रहना पड़ता।

अभिषेक द्वारा तैयार किए गए यह एक ऐसा इनोवेशन था जिससे कि खाना बनाने में घंटों तक खड़ा रहने की झंझट से पूरी तरह छुटकारा मिल सकता है। आपको बता दें कि अभिषेक के इस इनोवेशन को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 2012 में इन्हें सम्मानित किया था। दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया।

अक्षय कुमार से भी पा चुके हैं सम्मान

आपको बता दें अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन के सिलसिले में साल 2018 में उन्होंने कई अविष्कारको को सम्मानित किया था। इसमें भागलपुर के नवगछिया जिले के रहने वाले अभिषेक को भी 5 लाख का सम्मान मिला था। इस पैसे से अभिषेक ने अपनी कंपनी रोबोथिग गैजेट प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की। आपको बता दे अभी तक एक युवा वैज्ञानिक के तौर पर दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

क्या है भविष्य की योजना

अभिषेक ने बताया कि वह जल्द ही अपने रोबोटिक कुकर में एक नया फीचर जोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने बताया इस कुकर में एक ऐप का नया फीचर जोड़ा जाएगा जो कुकर को निर्देश देगा और आपका खाना बन कर तैयार। अभिषेक के इस इनोवेशन की एक और खासियत है कि आप अपने रिश्तेदारों को रेसिपी ट्रांसफर भी कर सकते हैं और और खाना बन कर अपने आप तैयार हो जाएगा।

Abhishek ने बताया कि करीब अब तक 15 से ज्यादा यूनिट बेच चुके हैं और रिटेल मार्केट में जल्दी उतारने की योजना बनाएं हैं। अभिषेक ने बताया कि इस रोबोटिक कुकर की कीमत करीब 15,000 है और यह आकार पर निर्भर करता है जैसे-जैसे उनके उत्पादों की मांग बढ़ेगी और धीरे-धीरे इन रोबोटिक कुकर की कीमत कम होती जाएगी।

अभिभावकों शिक्षकों को सलाह

अभिषेक ने बताया कि आज के दौर में अभिभावकों और शिक्षकों को समझने की जरूरत है कि आखिरकार बच्चे को किस क्षेत्र में रुचि है जिस क्षेत्र में हुआ रुचि रखता है उसे उसी क्षेत्र में मौका देना चाहिए।

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