सब्सिडी खत्म होते ही महंगा हुआ संसद मे खाना, नई रेट लिस्ट मे 3 रुपये से 700 रुपये तक का खाना

Written by: Satish Rana | biharivoice.com • 29 जनवरी 2021, 6:50 अपराह्न

हमेशा से लोगों के मन में एक सवाल उमड़ता रहा कि आखिर जनता के पैसों पर सांसदों को इतनी सस्ती सस्ती दरों में नाश्ता क्यों मिल जाता है? 29 जनवरी यानी आज से संसद सत्र शुरू होने वाला है अब सांसद के कैंटीन में खाना खाने के लिए सांसदों को ज्यादा रुपए चुकाने पड़ेंगे। पहले चिकन बिरयानी की कीमत 65 रुपये हुआ करती थी और रोटियां 2 रुपये में मिलती थी लेकिन सब्सिडी खत्म होने के बाद चिकन बिरयानी 100 रुपये में मिलेगी।

केंद्र सरकार ने संसद भवन परिसर में चलने वाली कैंटीन की सब्सिडी खत्म करने के बाद नहीं रेट लिस्ट जारी कर दी गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 20 जनवरी को ही कैंटीन से सब्सिडी खत्म किए जाने के फैसले के बारे में जानकारी दे दी थी।नई रेट लिस्ट जारी के अनुसार इसमें 3 रुपये से लेकर 700 रुपये तक का खाना शामिल है। इस नई रेट लिस्ट के तहत अब सांसदों को शाकाहारी खाने की थाली के लिए 100 रुपये चुकाने होंगे। वही मांसाहारी बफे के लिए करीब 700 रुपये तक देने पड़ेंगे।

आपको बता दें कि अब तक उत्तर रेलवे सांसद के कैंटिनो का संचालन करता रहा है। उत्तर रेलवे करीब 55 वर्षों से सांसदों को भोजन उपलब्ध करा रहा था। लेकिन अब भारतीय पर्यटन विकास निगम सांसद कैंटीन का संचालन करेगा।

कैंटीन में मिलेंगे 58 फूड आइटम्स

पहले संसद की कैंटीन में भोजन और फूड आइटम्स बेहद सस्ता हुआ करते थे। लेकिन अब फूड आइटम्स के रेट बढ़ा दिए गए हैं। नई लिस्ट के मुताबिक 27 जनवरी से कैंटीन में 58 फूड आइटम्स उपलब्ध होंगे। इस फूड आइटम्स में नॉन वेज और वेज दोनों शामिल रहेगा। आपको बता दें कि मटन करी के लिए 125 रुपये, मटन कटलेट और मटन बिरयानी के लिए 150 रुपये चुकाने होंगे। वही समोसे, ब्रेड पकोड़ा, आलू बोंडा और दही का रेट 10 रुपये होगा।

सब्सिडी खत्म होने के बाद वेज थाली अब 100 रुपये तथा चिकन करी के लिए 75 रुपये देने होंगे। वही शाकाहारी बिरयानी की कीमत 50 रुपये और चिकन बिरयानी की कीमत 100 रुपये होगी। इसके अलावा अगर बात अंडा करी की करें तो इसके लिए 30 रुपये और फिश एंड चिप्स के लिए 110 रुपये चुकाने होंगे। वही वेज बफे 500 रुपये में मिलेगा और नॉनवेज बफे के लिए 700 रुपये देने पड़ेंगे। इसके साथ सलाद के लिए भी 9 रुपये अलग से देने पड़ेंगे।

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