अनोखी पहल: ज्यादा पैदावार के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाकर खेती कर रहा किसान

मध्य प्रदेश के सागर के किसान ने अपने 12 एकड़ के फार्म हाउस में म्यूजिक सिस्टम लगाये है, खुद के लिए नही बल्कि वहाँ की फसलो, पेड़-पौधो, गायो और जीव-जन्तुओ को संगीत सुनाने के लिए  इसका जबरदस्त सकारात्मक परिणाम सामने आया है. सागर के ये युवा किसान अपने खेत में हल्दी,अदरक, अरहर और टमाटर जैसी कई फसलें उगा रहे हैं. इन्होंने खेत में एक बड़ा म्यूजिक सिस्टम लगाया है, जो फसल बुवाई से लेकर कटाई तक फसलों को म्यूजिक सुनाता है.

मध्य प्रदेश के सागर स्थित तीली के रहने वाले एक किसान अकाश चौरसिया कपूरिया गांव में जैविक खेती कर रहे हैं, जो पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को म्यूजिक थेरेपी दें रहे हैं. अकाश पेड़ पौधे और जीव-जंतुओं के लिए म्यूजिक सिस्टम लगा रखा है उनका मानना है कि जैसे इंसान तनाव में होता है वैसे ही पेड़ पौधे और जीव जंतुओं में भी तनाव होता है. उनके तनाव को दूर करने के लिए अलग-अलग प्रकार के साउंड उनको देते हैं. जैसे भवरे की गुनगुनाहट, गायत्री मंत्र का साउंड अलग-अलग समय पर देते हैं. जब भी इंसान तनाव में रहता है तो वह भी कभी-कभी म्यूजिक चलाकर अपनी स्ट्रेस दूर करता है उसी तरह यह प्रयोग जीव-जंतुओं जंतुओं और पेड़ पौधों पर भी किया जा रहा है.

युवा किसान आकाश चौरसिया सागर से सटे गाँव तीली व कपूरिया में जैविक खेती करते है यहाँ सबकुछ जैविक उत्पन्न किया जा रहां है चौरसिया का यह प्रयोग यही नही थमा. उन्होंने केचुओ को भी संगीत सुनाया, जो 10 किलो के केंचुए पहले 1 ट्राली गोबर खाद बनाने में 90 दिन का वक्त लेते थे वे अब रोज रात संगीत सुनकर यही काम 60 दिन में कर रहे है.
 

इसी तरह जब गाय गर्भावस्था में होती है और दूध लगने का जब समय आता है तब गाय को गायत्री मंत्र की थेरेपी देते हैं इससे देसी गाय भी एक से डेढ़ लीटर दूध ज्यादा देने लगती है. केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व वनस्पति शास्त्री डॉ अजय शंकर मिश्रा से जब इस फसलों और जीव जंतु और गायों में म्यूजिक थेरेपी से हुए इंप्रूवमेंट को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि 120 साल की रिसर्च में यह सामने आया है कि पौधे बहुत सेंसिटिव होते हैं और वह संगीत महसूस करते हैं.

म्यूजिक सुनाने पर पौधों में प्रूवमेंट

केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व वनस्पति शास्त्री डॉ अजय शंकर मिश्रा ने बताया कि क्लासिकल म्यूजिक सुनाने पर पौधों में प्रूवमेंट होता है और जो आकाश चौरसिया ने किया है उसमें कहीं कोई गलती नहीं है यह सिद्धांत पहले से ही प्रतिपादित है जैविक खेती में म्यूजिक थेरेपी से हुए लाभ के बाद आकाश जैविक खेती को लेकर अपने कृषि फार्म पर दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को प्रशिक्षण भी देते हैं.

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