Sunday, June 4, 2023

कारखाने मे लोहा काट बना आर्मी ऑफिसर, ऐसे तय किया अफसर बनने तक का सफर

मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती है. एक-न-एक दिन उसका फल अवश्य मिलता है. यदि कोई सच्चे मन से कुछ हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम करता है तो उसका फल मिलना निश्चित है.इन सब बातों को सही साबित कर दिखाया है बिहार के लाल बालबांका तिवारी ने. वह आर्मी मे लेफ्टिनेंट बन गए हैं. लेफ्टिनेंट बालबांका तिवारी के पिता विजय शंकर तिवारी एक साधारण किसान हैं.

बालबांका एक किसान परिवार से हैं और उन्होंने अभावों में अपना जीवन जिया। वह खुद बताते हैं कि 12वीं की पढ़ाई के बाद आरा से ओडिशा के राउरकेला चले गए थे। इस दौरान खर्च चलाने के लिए उन्होंने लोहे की फैक्ट्री में काम किया, इसके बाद वह नमकीन की फैक्ट्री में काम करने लगे।बेटे की इस सफलता पर फूले नही समा रहे हैं विजय शंकर तिवारी की माने तो उनके बेटे ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है, जिसका फल उसको देहरादून में आर्मी के पासिंग आउट परेड में पास होकर लेफ्टिनेंट बनने पर मिला है. 

उड़ीसा के राउरकेला पहुंचकर उन्होंने सरकारी इंटर कॉलेज में एडमिशन लेने के साथ ही लोहे की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया. फैक्ट्री में लोहा काटने से लेकर लोहा गलाने का काम करना होता था उन्होंने यहां करीब 7 महीने काम करने के बाद वह एक नमकीन की फैक्ट्री में चले गए. यहां भी उन्हें सेल्समैन के तौर पर घर-घर और दुकानों में जाकर नमकीन बेचनी पड़ती थी.

घर-घर जाकर बेची नमकीन

उड़ीसा के राउरकेला पहुंचकर उन्होंने सरकारी इंटर कॉलेज में एडमिशन लेने के साथ ही लोहे की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया. फैक्ट्री में लोहा काटने से लेकर लोहा गलाने का काम करना होता था उन्होंने यहां करीब 7 महीने काम करने के बाद वह एक नमकीन की फैक्ट्री में चले गए. यहां भी उन्हें सेल्समैन के तौर पर घर-घर और दुकानों में जाकर नमकीन बेचनी पड़ती थी.

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ट्यूशन भी पढ़ाया

साल 2011 में राउरकेला के कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने ट्यूशन देना भी शुरू कर दिया. ट्यूशन से पैसे अच्छे आने लगे तो नमकीन फैक्ट्री की नौकरी छोड़ दी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में वह सेना में बतौर जवान भर्ती हो गए और फिर आर्मी कैडेट कॉलेज में प्रवेश की तैयारी की उन्होंने SSC के जरिए अफसर बनने का सपना पूरा किया.

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POP में पहली दफा बेटी से मिले

एक और जहां वह सेना में अफसर बने तो दूसरी और पहली दफा वह अपनी बेटी से मिले. शनिवार को पीओपी के दौरान बाल बांका की खुशी दोगुनी हो गई बालबांका ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से वह लंबे समय से घर नहीं जा सके. उन्होंने कहा कि 3 महीने पहले ही उनकी बेटी हुई लेकिन उन्हें घर जाने का मौका नहीं मिल पाया.

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