Wednesday, February 8, 2023
spot_img

तीन बेटियां होने पर पड़ोसी कहते थे- अबॉर्शन करा दो, आज तीनों बेटियां IAS बन परिवार का नाम किया रौशन

बेटियां समाज व देश की शान हैं. बेटियां न होतीं, तो न ही हम होते और न ही आप, न तो समाज होता और न ही देश व दुनिया. देश प्रगति कर रहा है. लड़कियों की शिक्षा के प्रति अभिभावक सचेत भी हुए हैं, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बेटी का पैदा होना अभिशाप माना जाता है. अभिभावक उनकी शिक्षा-दीक्षा पर ध्यान नहीं देते. बेटे को वंश चलाने वाला मान कर उसके जन्म पर ज्यादा खुशी व्यक्त की जाती है. जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा, बेटी के प्रति परिवारों में सम्मान का भाव कम ही रहेगा.

whatsapp

फिर भी समाज का एक तबका अभी भी बेटियों को एक अलग नजरिए से देखता है. समाज के दूसरे तबके को लगता है कि बेटियां बस घर की बोझ होती है. Bihari Voice की टीम आज एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जिन्हें पैदा होने से पहले ही लोग कह रहे थे कि अबॉर्शन करवा दो. लेकिन आज वही तीनों बेटियां आईएस की कुर्सी पर बैठकर सफलता की नई ऊंचाइयां छू रही है.

चंद्रसेन सागर बरेली के पूर्व ब्लाक प्रमुख हैं. उनकी पत्नी का नाम मीना सागर है. उनकी तीन बेटियां है अर्पित, अर्जित और आकृत तीनों ही आईएस के पद पर हैं. चंद्रसेन सागर राजनीति में है उनका कहना है राजनीति में होने के बावजूद भी उनका प्रयास रहता है कभी भी किसी का बुरा ना हो. अच्छे कर्म का फल हमेशा अच्छा ही होता है

इसलिए शायद उनकी अच्छाई का फल उनकी बेटियों को मिलता है. चंद्रसेन सागर की पत्नी मीना सागर को अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई की सबसे ज्यादा चिंता होती है. तीनों बेटियों को इम्तिहान के दौरान उनके साथ रहती है ताकि किसी भी प्रकार की परेशानियां और कठिनाइयों का सामना ना करना पड़े और पढ़ाई में रुकावट पैदा ना हो.

whatsapp-group

IAS बनाने में मां की अहम भूमिका

अक्सर देखा जाता है कि घर के निर्णय एक पुरुष के द्वारा ही लिया जाता है. लेकिन इसके विपरीत चंद्रसेन सागर की पत्नी मीना सागर ने अपनी सभी बेटियों का ख्याल बहुत अच्छे तरीके से रखा. वह हमेशा अपने बेटियों के साथ रहती है भले ही उनके पति बरेली में अकेले रहते हैं लेकिन वहीं से अपनी बेटियों की हौसला अफजाई करते हैं. तीनों बेटियों को आईएस बनाने में मीना सागर की बहुत बड़ी भूमिका रही है.

पिता ने हमेशा प्रोत्साहित किया

अर्जित, अर्पित और आकृत के पिता ने कभी भी तीनों पर सपनों के बोझ को नहीं डाला. उन्होंने कभी भी अपनी इच्छा को तीनों बेटियों के ऊपर नहीं थोपा. तीनों को जिस क्षेत्र में जाने का मन था उसे चुनने के लिए वह खुले रुप से स्वतंत्र थी. चंद्रसेन सागर ने बताया कि बेटियां जो बनना चाहती थी वही बनी उनके सपनों को पूरा करने में मैंने उनका साथ दिया.

भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि समाज में वास्तव में बेटियों को लेकर सोच अच्छी नहीं रही जब लगातार बेटियां हुई तो कुछ लोग अल्ट्रासाउंड का सुझाव देकर कहने लगे कि अबॉर्शन करा दो नहीं तो झेल नहीं पाओगे. पहले के समय में अल्ट्रासाउंड कराने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं था लेकिन हम लोग किसी के झांसे में नहीं आए और दोनों पति और पत्नी ने विचार किया कि बेटा हो या बेटी इसमें कोई भेदभाव नहीं करेंगे.

बातचीत के दौरान चंद्रसेन सागर ने कहा कि बेटा हो या बेटी यह सब ईश्वर की देन है. आज हमें हमारे फैसले पर बहुत नाज हैं. जो लोग बेटियों के अबॉर्शन का सुझाव दे रहे थे उन्हीं बेटियों ने मेरे अधूरे सपने को सच कर दिखाया जिससे हमारा सर आज फक्र से ऊंचा हो गया है.

आज चंद्र सेन सागर की पहचान एक नेता सेना होकर 3 आईएस बेटियों के पिता के रूप में हुई है. आज चंद्र सेन की तीनों बेटियां आईएस बनकर सफलता का परचम लहरा रही है सच में एक पिता के लिए यह बहुत गर्व की बात है.

Stay Connected

267,512FansLike
1,200FollowersFollow
1,000FollowersFollow
https://news.google.com/publications/CAAqBwgKMIuXogswzqG6Aw?hl=hi&gl=IN&ceid=IN%3Ahi

Latest Articles