Monday, February 6, 2023
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आखिर ट्रेन के डब्बे अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं? क्या है दोनों में अंतर, जानें !

भारतीय रेलवे लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है मुंबई की लोकल ट्रेन तो मुंबई की जान ही कहलाती हैं. आपने भी कई बार ट्रेन का सफर किया होगा लेकिन आपने कभी गौर किया है ट्रेन का रंग नीला या लाल या कोई और रंग का क्यों होता है. इस रंग के पीछे भी कई कारण होते हैं और हर कोच के लिए अलग रंग तय होता है. कोच की डिजाइन और विशेषता के आधार पर इनका रंग तय किया जाता है. आइए जानते हैं किस तरह के कोच में कौन-सा रंग किया जाता है…

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दो तरह के होते हैं ट्रेन के कोच ICF & LHB

अपने सफर के दौरान या रेलवे स्टेशन पर कई बार देखा होगा कि किसी ट्रेन के कोच लाल रंग का होता है और किसी ट्रेन का कोच नीले रंग का होता है. ट्रेन के कोच के रंग का यह अंतर उसको का प्रकार दर्शाता है. दो तरह के होते हैं ट्रेन कोच ICF & LHB. ट्रेन के नीले रंग के कोच को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF- Integral Coach Fa tory) कहते हैं जबकि लाल रंग के कोच को लिंक होफमैन बुश (LHF – Linke Hofmann Busch) के नाम से जाना जाता है. ट्रेन के कोचों में लाल और नीले रंग का ही फर्क नहीं होता बल्कि दोनों तरह के कोच एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं.

नीले रंग वाले कोच ( Integral Coach Factory)

अक्सर ट्रेनों में नीले रंग वाले कोच देखने को मिलते हैं. इसको हम ICF कोच यानी Integral Coach Factory कोच कहते हैं.  आईसीएफ कोच की मैक्सिमम परमीसिबल गति 110 किमी/घंटा तक होती है. इसका इस्तेमाल अक्सर मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में किया जाता है. इन सारे डब्बों का निर्माण तमिलनाडु में होता है. क्योंकि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है. इसकी स्थापना 1952 में हुई थी. 

नीले डब्बों की खासियत है कि इन्हें बनाने में लोहे का इस्तेमाल किया जाता है. इस वजह से ये डब्बे भारी भी होते हैं. इसके रख-रखाव में ज्यादा खर्च भी होता है. वहीं, अगर बैठने की बात करें, तो सामान्य आरक्षण वाले डब्बे में 72 सीटें और एसी में 64 सीटें होती हैं. इन कोच में एयर ब्रेक का यूज किया जाता है. साथ ही साथ प्रत्येक 18 महीने में इनको ओवरहॉलिंग की जरूरत होती है.

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लाल रंग वाले कोच (Linke Hofmann Busch)

एलएचबी कोच जिसका मतलब होता है (Linke Hofmann Busch)। ये आइसीएफ कोच से अलग होती हैं। देश की सबसे तेज ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस में LHB (Linke Hofmann Busch) कोच का प्रयोग किया जाता है। जबकि की क्षमता 160 से 180 किमी प्रति घंटे की होती है। ICF कोच के मुकाबले LHB कोच काफी बेहतरीन होते है। बता दें, LHB कोच को फास्ट स्पीड ट्रेन के लिए ही डिजाइन किया गया है। LHB कोच में रेलवे यात्रियों की यात्रा काफी सुरक्षित होती है और इनमें दुर्घटना होने की आशंका कम रहती है।

दोनों में से कौन कोच सबसे बेहतर

अभी आप बेहतर तरीके से समझ गए होंगे कि कौन से को सबसे ज्यादा बढ़िया है आईसीएफ कोच के मुकाबले एलबीएच कोच में दुर्घटना होने की आशंका भी कम रहती है और इसमें सीटों की संख्या भी ज्यादा होती है. ICF कोच के मुकाबले LHB कोच काफी बेहतरीन होते है. बता दें, LHB कोच को फास्ट स्पीड ट्रेन के लिए ही डिजाइन किया गया है. इनमें क्षमता होती है कि ये 160 से 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड में दौड़ सके.

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