Hartalika Teej 2023: कैसे करते है हरतालिका तीज का व्रत? जाने तीज के नियम और पूजा विधी

Written by: Kavita Tiwari | biharivoice.com • 15 सितम्बर 2023, 6:26 अपराह्न

Hartalika Teej Subh Muhurat: इस साल हरतालिका तीज का त्योहार 18 सितंबर 2023 को पड़ रहा है। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और पति की लंबी आयु की कामना के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना करती है।

Hartalika Teej Subh Muhurat And Pooja Vidhi: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का त्यौहार मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक हरतालिका तीज भाद्रपद या भादो मास के महीने में पड़ती है। इसे बड़ी तीज भी कहा जाता है। इस साल हरतालिका तीज का त्योहार 18 सितंबर 2023 को पड़ रहा है। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और पति की लंबी आयु की कामना के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना करती है। हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रत में से एक है, क्योंकि इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत करते हुए कई नियमों का पालन भी करती है और साथ ही पूजा-पाठ भी करती है।

क्या है हरतालिका तीज व्रत रखने के नियम(Hartalika Teej Subh Muhurat )?

  • हरतालिका तीज के दिन व्रती महिलाओं को रात्रि में सोने की मनाही होती है।
  • हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जो महिलाएं रात को सो जाती है उनका अगला जन्म मगरमच्छ योनि में होता है।
  • इस दिन महिलाओं को रात्रि के समय जागरण भजन कीर्तन करते रहना चाहिए।
  • इस व्रत के शुरू होने के साथ ही व्रती महिलाओं को अन्न, जल ग्रहण करने की भी मनाही होती है। वह अगले दिन सुबह पूजा करने के बाद ही जल को ग्रहण कर व्रत को खोलती है।
  • हरतालिका तीज व्रत से जुड़ी मानता है कि एक बार इस व्रत को शुरू करने के बाद महिला जीवन भर इस व्रत का पालन करती है।
  • हरतालिका तीज व्रत और कथा सुनने के बाद ही व्रत को पूर्ण माना जाता है। इस दिन हर व्रत रखने वाली महिला को कथा अवश्य सुनाई या पढ़नी चाहिए।
  • हिंदू मान्यताओं के मुताबिक हरतालिका तीज व्रत में महिलाएं जिस भी तरह का भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोलती है, उन्हें अगले जन्म में उसी की प्रकृति के आधार पर उस योनि में जन्म मिलता है।

हरतालिका तीज के व्रत में व्रती महिलाओं को अन्न, जल और फल सभी चीजों को त्याग कर निर्जला व्रत रखना होता है। हरतालिका तीज की कथा के मुताबिक इस व्रत में जो महिला पानी पीती है, उसे अगले जन्म में मछली और फल खाने वाली महिला को बंदर के रूप में जन्म मिलता है।

(नोट- बता दे ऊपर लिखित पूरा लेख ज्योतिषी एवं हिंदू धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लिखित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं)

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Kavita Tiwari

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