जब बिहार के विधायकों से पूछा गया क्यों नहीं लगाया कोरोना वैक्सीन, जवाब सुनकर हैरान हो जाएंगे आप

पिछले वर्ष जब पूरा देश कोरोना से त्राहिमाम कर रहा था तो सभी बस यही दुआ कर रहे थे कि कोरोना की वैक्सीन निकल जाए, और सफल रहे। पूरी दुनिया में आलम यह था कि लोग सोच रहे थे कि अगर सरहद पार भी वैक्सीन सफल रही तो दुनिया बच जायेगी। गौरतलब है कि एक वैक्सीन बनाने में कई वर्ष लग जाते हैं लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वदेशी तकनीक की बदौलत एक वर्ष से भी कम समय में सफल वैक्सीन ईजाद की, इसके लिये सरकार ने कई गुना अधिक खर्च किया, डॉक्टरों और वैज्ञानिको ने रात की नींद हराम कर दिन रात एक कर दी।

अब वैक्सीकरण का दूसरा चरण शुरू हो गया है । बिहार में वैक्सीन मुफ्त में लगाए जा रहे लेकिन फिर भी लोगो के मन में शंकाएं हैं। लोगो की शंका को दूर करने के लिय पीएम मोदी ने 1 मार्च को और उसके बाद बिहार के सीएम नीतिश कुमार भी टीका ले चुके है, जिसके बाद बड़ी संख्या में सत्ता पार्टी के विधायकों और सांसदों ने वैक्सीन लेने में रुचि दिखाई। लेकिन विपक्ष के विधायकों ने वैक्सीन लेने में अभी तक कोई रुचि नहीं दिखाई है। इसके लिये उनके बहाने भी गजब गजब के हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायकों से आग्रह किया है कि वे कोरोना से बचाव के लिये टीका ले लें।

माले विधायक सत्यदेव राम ने टीका ना लेने का कारण बताते हुए कहा कि टीका अमीरों के लिये बना है और जब तक गरीबों को टीका नहीं लग जाता, वे भी नहीं लेंगे। राजद विधायक मुकेश रौशन ने तो यहाँ तक कह दिया की वे तब तक वैक्सीन लेने का जोखिम नहीं उठाना चाहते जब तक की चचा नीतीश के 24-48 घंटे सकुशल नहीं निकल जाते। राजद के एक अन्य विधायक रामबली यादव ने तो साफ साफ कह दिया कि जब तक वे टीका का असर न देख ले, वे तो नहीं लेनेवाले, क्यों ले…बड़े बड़े अधिकारी और नेता भी पहले सिपाही और ड्राइवर पर टेस्ट करवा के देख रहे थे।

कांग्रेसी विधायक मुरारी गौतम ने कहा कि” क्या करें , वक्त ही नहीं मिला, मौका मिलते ही ले लेंगे।” राजद के विधायक रामानुज प्रसाद ने कहा कि उन्हें तो यही नहीं पता कि टीका मिल रही, पता मिल जायेगी तो ले लेंगे। जदयू के वरिष्ठ नेता महेश्वर हजारी ने टीका पर राजनीति न करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि वैक्सीन तो स्वदेशी तकनीक से बनाई गयी है, फिर ऐसा क्यों।

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