जज्बे को सलाम! 83 साल की उम्र में इंग्लिश से किया पोस्ट ग्रेजुएशन, जाने सोहन सिंह की कहानी

किसी ने सच ही कहा है कि पढ़ाई की कोई उम्र नही होती। अगर आपके मन में जिज्ञासा है और पढ़ाई में रुचि है तो आप कभी भी अपनी पढ़ाई कर सकते है। इसी बात को सच किया है पंजाब के एक शख्स ने। फेमस यूनिवर्सिटीज में से एक लवली प्रोफ़ेशनल यूनिवर्सिटी से 83 साल के उम्र के बुजुर्ग आदमी ने अंग्रेजी से अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है। इस शख्स का नाम सोहन सिंह है. इन्हें यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सम्मानित भी किया है।

होशियारपुर के दात्ता गांव कोट फतुही में साल 1936 को सोहन सिंह ने जन्म लिया था. अपनी प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई वही के स्कूल से की थी। साल 1953 में सोहन ने अपनी मैट्रिक की परीक्षा पास की और फिर वही के श्री गुरु गोबिंद सिंह खालसा स्कुल से अपनी ग्रेजुएशन पूरी कि। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद साल 1957-58 में टीचिंग ट्रेनिंग भी पूरी की और उसके बाद एक कॉलेज में बतौर लेक्चरर काम भी क़िया। इतना ही उन्होंने पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में शिक्षा के क्षेत्र में 33 सालों तक सेवाएं दी और फिर वापिस भारत लौटे। जब वह भारत आये तो उन्होंने अपने मन में छिपे 61 सालों की ख्वाइश को पूरा किया और 83 साल की उम्र में एमए इंग्लिश की डिग्री हासिल की।

1958 में चले गए केन्या

पढ़ाई के साथ साथ सोहन सिंह दूसरे क्षेत्रों में आगे रहे है। वह होशियारपुर के इंटरनेशनल हॉकी में ग्रेड अंपायर भी राह चुके है। इसके अलावा उन्होंने केन्या में भी बतौर सचिव हॉकी अंपायर एसोसिएशन में 6 साल काम किया है । सोहन सिंह ने बताया कि साल 1958 में केन्या के लिए वीजा की सेवाएं शुरू हो गई थी और तभी वो वहां अपने साडू सेवा सिंह बड़ैच के साथ चले गए थे।

सोहन सिंह की हमेशा से ख्वाइश थी कि वह इंग्लिश से एमए करें, ऐसे में उनकी यह इच्छा केन्या में पूरी ना हो सकी । जब वह भारत लौटे तो होशियारपुर के स्कूल में बच्चो को पढ़ाने लगे। साल 2017 में वह रिटायर हो गए। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी की अधूरी ख्वाइश को पूरी करने का सोचा जिसके लिए उनके बेटे और पत्नी ने भी उनकी हिम्मत बढ़ाईं ।

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परिवार के सहयोग हुआ सपना पूरा

25 सालों तक केन्या में सेवाएं देने वाले और इंडियन हॉकी टीम के कप्तान जरनैल सिंह के साथ खेल चुके सोहन सिंह आज अपनी मास्टर्स की डिग्री लेकर बहुत खुश है। उनके इस यात्रा में उनकी पत्नी और बेटे के साथ साथ उनके सकरात्मक सोच ने उन्हे आगे बढ़ने का हौसला दिया जिसके दम पर आज उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदल दिया। अब उनकी इच्छा है कि वो बच्चों के लिए एक किताब लिखे और इसे भी वह जल्द ही पूरा करेंगे।

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