Wednesday, February 8, 2023
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NAVY में शामिल हुआ INS Karanj पनडुब्बी, जानिए क्यों इसे कहा जाता है साइलेंट किलर!

समुन्द्र का साइलेंट किलर कहा जाने वाला स्कोर्पिन क्लास सबमरीन आईएनएस करंज को बुधवार को भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में जोड़ा गया है। मुंबई स्तिथ नौडेन की पश्चिमी कमान के मुख्यालय में सैन्य परमपरा के तहत नेवी चीफ एडमिरल कर्मवीर सिंह ने एक कार्यक्रम में करंज पनडुब्बी को शामिल किया। मंझगाव डॉकयार्ड लिमिटेड यानी कि एमडीएल ने स्कोर्पिन क्लास की इस तीसरी पनडुब्बी का निर्माण फ्रांस की मदद से किया है। आज समुंदर के साइलेंट किलर कहे जाने वाले आईएनएस करंज के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं।

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आईएनएस करंज में दुनिया का सबसे अच्छा सोनार सिस्टम लगाया गया है जिसका फायदा यह है कि इसके आवाज किसी को भी सुनाई नही दे सकती और यह बड़ी आसानी से किसी भी दुश्मन के घर में घुस कर उसे तबाह कर सकता है और इन्ही कारणों के वजह से इसे समुंदर का साइलेंट किलर कहा जा रहा हैं।

आपको बतादें की स्कोर्पिन क्लास एक डीजल सबमरीन है और इस पनडुब्बी को 40-50 दिनों तक करीब 350 मीटर गहरे समुंदर में तैनात भी किया जा सकता है। वही करंज पनडुब्बी की अंग्रेजी स्पेलिंग से नौसेना ने एक अलग शब्दावली तैयार की है जिसमे K का मतलब है किलर इंस्टिंक्ट, A का मतलब है आत्मनिर्भर, R का मतलब है रेडी, A का मतलब है एग्रेसिव, N का मतलब है निम्बल और J का मतलब है जोश।

बात करें अगर आईएनएस करंज के आकार की तो वह करीब 70 मीटर लंबा, 12 मीटर ऊंचा और 1565 टन भारी है। इसके अलावा यह पनडुब्बी समुन्द्र में माइंस बिछाने में सक्षम है और साथ ही मिसाइल और टॉरपीडो से लैस है। और इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी के पकड़ में आये हुए जमीन पर हमला कर सकती है और साथ ही इसमें ऑक्सीजन बनाने की क्षमता है जिसका फायदा यह है कि यह लंबे समय तक पानी में राह सकती है।

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आईएनएस करंज का भारतीय नौसेना के मिलन किसी वरदान से कम नही है। हम सब जानते है कि इन दिनों हिन्द महासागर में चीनी नौसेना और उसकी जंगी बेड़ा भारतीय नौसेना को कड़ी चुनौती दे रही हैइतना ही नही चीन पनडुब्बियां पाकिस्तानी नौसेना के लिए एक बेड़ा भी तैयार कर रही है।

आपको बतादें की साल 2005 में फ्रांस के साथ भारतीय नौसेना ने प्रोजेक्ट 75 के तहत छह स्कोर्पिन पनडुब्बियों को बनाने की हामी भरी थी। हालांकि, वर्ष 2012 तक नौसेना को पहली सबमरीन मिल जानी चाहिए थी, लेकिन पहली स्कोर्पीन क्लास पनडुब्बी, कलवरी 2017 में ही भारतीय नौसेना को मिल पाई थी. खंडेरी वर्ष 2019 में नौसेना की जंगी बेड़े में शामिल हुई थी.

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