बेटी हुआ जन्म तो ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया बाहर, न्याय पाने के लिए बन गई जज

जब इरादों में दम हो और हौसले बुलंद हो तो हर कठिन परिस्तिथि में लोग सफल होते है। मन दृढ़ता से भरा हो तो कुछ भी मुश्किल नही होता। इन्ही बातों की जीती जागती उदहारण हैं वृंदावन की अवनिका गौतम। जिन्होंने अपने कठिन समय मे हिम्मत नही हारी ना ही अपने हौसले को टूटने दिया।

एक खुशहाल शादी शुदा जिंदगी बिता रही अवनिका के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद वह बिखर गई, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और मजबूती से परिस्थितियों का सामना किया। इतना ही नही उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और आज वह झारखंड हाइकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार का पद सम्भाल रही हैं। पीसीएस-जे यानी कि झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास कर आज वह यहां तक पहुंची हैं। लेकिन उनका यह सफर आसान नही था।

दहेज के लिए ससुराल वालों ने किया परेशान :-

वृंदावन से ताल्लुक रखने वाली अवनिका गौतम की शादी साल 2008 में जयपुर में हुई थी। कुछ दिनों तक उनकी शादी शुदा जिंदगी बेहद खुश हाल थी पर समय बीतने के साथ उनके ससुराल वालों ने उन्हें दहेज के लिए परेशान करना शुरू कर दिया लेकिन अवनिका ने यह बात अपने परिवार वालों को नही बताई और चुप चाप सबकुछ सहती रही।

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बेटी के जन्म के बाद घर से हुई बाहर:-

जिस देश में बेटियों को लक्ष्मी का दर्जा दिया जाता है उस देश में आज भी ऐसे कई लोग है जिन्हें बेटियों के पैदा होने से दिक्कत है। यही हुआ अवनिका के साथ। उनके ससुराल वाले दहेज को लेकर प्रताड़ित करने तक ही नही रुके। जिस वक्त अवनिका को बेटी हुई उनके ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया जिसके बाद वह अपनी बेटी के साथ अपने घर वृंदावन आ गई। लेकिन उन्होंने उस वक़्त यह फैसला कर लिया कि वह शांत नही बैठेगी और इसका जवाब देके रहेंगी।

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घर से निकाले जाने के बाद अवनिका ने यह फैसला किया की वह कोर्ट जाएंगी और अपने हक के लिए इंसाफ मांगेगी। लेकिन कोर्ट कचहरी और वकीलों के चक्कर काटते काटते वह इतना टूट गई कि उन्होंने खुद ही वकालत करने का निर्णय लिया। इसी निर्णय के साथ उन्होंने साल 2013 में पीसीएस-जे की तैयारी करनी शुरू की और ठीक एक साल बाद साल 2014 में वह सफल हुई और उन्होंने झारखंड हाइकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार का पदभार ग्रहण किया।

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