बीटेक के बाद इस लड़की ने शुरू किया जैविक खाद का काम, आज है करोड़ों में टर्नओवर, जाने आप भी !

मेरठ की सना खान बीटेक करने के बाद एक कंपनी में अच्छी खासी नौकरी कर रही थी लेकिन पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ से वे इस कदर प्रभावित हुई की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार करने का फैसला किया। उन्होंने जैविक खाद का कारोबार शुरू किया। उन्होंने इसकी शुरुआत महज पांच किलो केंचुए से की थी लेकिन अब उनका यह कारोबार करोड़ो का टर्नओवर दे रहा है। वे छः वर्षो से इस कारोबार में लगी हैं और अभी उनके कंपनी में 25 लोग कार्य करते हैं। वे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं।

जो डेयरी संचालक कभी गोबर को बेकार समझकर नाले में बहा दिया करते थे उसी गोबर से मेरठ की बेटी सना ने करोड़पति बनने और स्वरोजगार करने तक का सफर किया है। शुरूआती दौर में उन्हें कुछ मुश्किलें हुईं और समाज की दकियानूसी खयालातों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हाऱी और बेकार समझे जाने वाले गोबर को इकठ्ठा करती रही और केंचुए की सहायता से जैविक खाद बनाती रही। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी हिम्मत की सराहना भी की है।

सना खान को मेरठ की स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है। उनकी कंपनी का नाम ‘एसजे ऑर्गेनिक्स’ है जो पारंपरिक तरीके से जैविक खाद का निर्माण करती है। देश के अलग अलग राज्यों में उनके जैविक खाद की सप्लाई की जाती है, दुनिया के अन्य देशों से भी उनके खाद की लगातार डिमांड हो रही है। सना अपनी इस सफलता में अपने पिता भाई और पति को भागीदार मानती हैं। उनके पति अकरम ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अब सना के साथ हाथ बंटा रहे हैं। सना के पिता टेलरिंग का काम करते हैं , उनके नाना गैराज चलाते थे और फैक्ट्री में काम करते थे। अब परिवार के सभी लोग सना के साथ उसके काम में सहयोग करते हैं।

कैसे तैयार होता है कंपोस्ट

सना ने बताया कि केचुए तीन साल तक जीवित रहते हैं और तेजी से प्रजनन करते हैं। यह प्रक्रिया इस बिज़नेस को टिकाऊ और सस्ती बनाती है। सना खान ने बताया कि गोबर और जैविक पदार्थ लगभग डेढ़ महीने में वर्मी कंपोस्ट बन जाता है उसके बाद इसे छानकर इसमें गोमूत्र मिलाया जाता है। गोमूत्र प्राकृतिक कीटनाशक और उर्वरक का काम करता है। इसके बाद निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के लिये वर्मी कंपोस्ट के हर बैच का लैब में टेस्ट कराया जाता है। रिपोर्ट आने पर उसकी पैकिंग कराई जाती है और मार्किट में सप्लाई किया जाता है। इसके बाद खुदरा दूकान और नर्सरी से किसान यह जैविक खाद खरीदते हैं। सना हर महीने लगभग 150 टन वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन करती हैं

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