आम आदमी के पॉकेट पर बढ़ा महंगाई का बोझ, ऑटो, ई रिक्शा के बाद अब बसवालो ने बढ़ाया भाड़ा

लॉकडाउन तो ख़त्म हो गए, लेकिन इसके साथ ही बहुत सारी बाते बदल गयी जो निश्चित तौर पर आम पब्लिक को परेशान करेगी। लॉकडाउन के बाद जो हालात हुए और अर्थव्यवस्था चड़मराई उस घाटे की पूर्ति के लिए अब हर नागरिक के पॉकेट पर बस चारो और से प्रहार ही हो रही है। मंहगाई की मार चारो और से पड़ रही है। रोजमर्रा की जिंदगी में कटौती कर पाना मुश्किल है। एक तरफ लोगो की इनकम में गिरावट आई है तो वही बढ़ती महंगाई ने सबका लेखा बिगाड़ दिया है। लगभग ‘ आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपया’ की स्थिति बनती दिख रही है ।

पेट्रोल और डीजल के रेट के आगे लोग लाचार हो रहे हैं। इसका खामियाजा विशेष रूप से मध्यम वर्गीय लोगो को भुगतना पड़ रहा है। कॉलेज के लिये जा रहे विद्यार्थी हों या हर रोज ऑफिस जाने वाला कर्मचारी या फिर एक जगह से दूसरे जगह जानेवाले कारोबाऱी हो, सबकी हालात अब पतली होनेवाली है क्योंकि ऑटो, ई रिक्शा के बाद अब बस मालिको ने भी भाड़ा बढ़ा दिया है।

पहले ही बढ़ गए गई आटो के भाड़े

आम तौर पर बस भाड़े का निर्धारण सरकार निर्धारित करती है, जिसे लेकर राज्य का परिवहन विभाग बराबर गाइडलाइन जारी करता रहता है लेकिन बस मालिको ने एकतरफा ऐलान कर दिया है और मनमाने ढंग से रकम वसूली जायेगी । 200 मीटर हो या 1 किलोमीटर भाड़े की बढ़ती दर सबके लिये एक बराबर कर दी गई है। ऑटो और ई रिक्शा वालो ने पहले ही भाड़ा बाढा दिया है, जिस दूरी के लिये पहले छः रूपये लिए जाते थे अब उसके लिये आठ रूपये हो गए हैं। मनमानी की हद यह है कि पांच किलोमीटर तक जाने में 2 रूपया बढ़ाया गया है और बढ़ी हुई यह रकम 100- 200 मीटर जाने वाले से भी वसूला जा रहा, जिसे लेकर चालक और पैसेंजर में कहा सुनी भी होती है।

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बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ने लिया फैसला

रविवार को राजधानी पटना के बायपास रोड में बैरिया स्थित एक पेट्रोल पम्प पर ‘बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन’ के बैनर तले सभी बसवालो ने किराया 25 फ़ीसदी तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया। सरकार और स्थानीय प्रशासन भी इसे नजरअंदाज कर पूरे मामले से बचती नजर आ रही है। 15 मार्च से अब आपको वही दूरी तय करने के लिये 25 फीसदी अधिक भाड़ा देना होगा । यह सब पेट्रोल औए डीजल की बढ़ती कीमत का असर माना जा रहा। तो कुल मिलाकर नीतियां और राय जो हो हर चीज घूम- फिरकर आम आदमी के ही पॉकेट को नोचने पर लगी है, ऐसे में अब आम आदमी बस बेचारा बनकर रह गया है।

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