लाल चींटियों की चटनी से होगा कोरोना का इलाज? HC ने कहा पता लगाए आयुष मंत्रालय

Written by: Satish Rana | biharivoice.com • 01 जनवरी 2021, 3:53 अपराह्न

कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते खतरे के बीच हर किसी की नजर कोरोना वैक्सीन पर टिकी हुई है. इस बीच बड़ी खबर सामने आ रही है. जल्द ही कोविड को मात देने के लिए लाल चींटी की चटनी का इस्तेमाल हो सकता है. आपको बता दें कि उड़ीसा हाई कोर्ट ने आयुष मंत्रालय को ये पता लगाने का निर्देश दिया है कि क्या चींटियों की चटनी से कोरोना इलाज संभव है.

कोर्ट ने मंत्रलाय को तीन महीने का वक्त दिया है. 90 दिनों में आयुष मंत्रालय को इससे संबंध में फैसला लेना होग. आगामी तीन महीने में आपको कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लाल चींटियों की चटनी दवाई के तौर पर मिल सकती है. इसके लिए हाल में उड़ीसा हाईकोर्ट ने आय़ुष मंत्रालय को आदेश दिया है कि वे इस बात का पता लगाएं कि लाल चींटियों की चटनी कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार है. खास बात है कि देश के कई राज्यों में जनजातियां लाल चींटियों का इस्तेमाल बुखार, सर्दी-जुखाम, सांस लेने में परेशानी, थकान और दूसरी बीमारियों के इलाज में करती हैं.

एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उड़ीसा हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया. इस याचिका में लाल चटनी के प्रभाव को लेकर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर कोर्ट से दखल देने की मांग की गई थी. यह याचिका बारीपाड़ा के इंजीनियर नयाधार पाढ़ियाल ने दायर की थी. पाढ़ियाल ने जून 2020 में भी कोरोना महामारी से लड़ने के लिए चटनी के इस्तेमाल की बात कही थी. उनके मुताबिक जनजातीय इलाकों में कोविड-19 के कम असर की बड़ी वजह भी लाल चीटियों की चटनी का सेवन ही है.

लाल चींटियों की चटनी मे होता है कई विटामिन

पाढ़ियाल के अनुसार, चटनी में फॉर्मिक एसिड, प्रोटीन, केल्शियम, विटामिन B12, जिंक और आयरन होता है. ये सभी इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं. उन्होंने कहा था झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में लाल चीटियों को खाते हैं और कई बीमारियों का इलाज करते हैं.

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