ये समय ऐसा है जहाँ पैसा सबसे ऊपर है. लोग पैसों के लिए किसी भी तरह का काम करने को तैयार रहते हैं. कुछ अपना घर छोड़ देते है, तो कुछ अपना देश. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे युवक की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने अपने घर से ही शुरू कर दिया रोज़गार का मेला. ये कहानी है कुशीनगर के होनहार रवि प्रसाद की. रवि भी अपनी पढाई पूरी करते हीं नौकरी की तलाश में अपने घर से दूर हो गए थे. लेकिन वहाँ नौकरी नहीं मिलने पर उन्होनें हार नहीं मानी, एक बेहतर आईडिया के साथ वो खुद पर काम करने में लग गएँ और केले के कचड़े को बना दिया सैंकड़ों लोगों के कमाने का ज़रिया.पढ़िए उनकी प्रेरणादायक कहानी.
कौन है रवि प्रसाद ?

रवि प्रसाद 35 साल के एक युवा उद्यमी हैं. रवि मूल रूप से कुशीनगर के हरिहरपुर गांव के रहने वाले हैं.उन्होनें गोरखपुर के दिग्विजय PG कॉलेज से अपना स्नातक इकोनॉमिक्स विषय में किया. इसके तुरंत बाद ही वो दिल्ली की ओर नौकरी की तलाश में रवाना हो गए. भारत की राजधानी दिल्ली में इंसान चीटियों की माफिक दिखाई देते हैं. वहाँ हर इंसान इसी होड़ में रहता है कि जैसे तैसे उसे कोई अच्छी नौकरी मिल जाए.और ऐसी स्थिति में रवि के लिए नौकरी ढूंढ पाना बेहद मुश्किल हो रहा था.लेकिन तभी रवि की नज़र एक प्रदर्शनी की तरफ गई.
क्या है उनका सुपरहिट आईडिया?

जब उन्होनें उस प्रदर्शनी में पहुंचे एक दक्षिण भारतीय उद्यमी के स्टॉल को देखा, तब उनके होश ही उड़ गए. तमिलनाडु के कोयम्बतूर से आए उस व्यवसाई ने अपने स्टॉल पर केले के छिलके से बनाए गए कई प्रोडक्ट्स को सजाकर रखा था.उन प्रोडक्ट्स में बनाना फाइबर से बनें बैग,टोपी और कालीन जैसे सामान शामिल थे.इन प्रोडक्ट्स को रवि ने कभी भी अपने गाँव या आसपास के इलाकों के बाज़ार में नहीं देखा था.तभी रवि को आईडिया आया कि वो एक उद्यमी के तौर पर अपने गाँव में केला फाइबर से बने प्रोडक्ट्स बेचेंगे.
रवि ने केले के कचड़े से सामान बनाने का प्रशिक्षण लिया

प्रदर्शनी में केले के छिलके से बने प्रोडक्ट्स ने रवि को काफी प्रभावित किया था. उन्होनें कोयम्बतूर से आए व्यवसाई के काम को देख-देख कर केले के छिलके से बैग,टोपी और कालीन जैसी चीजों को बनाना तो सीख लिया. लेकिन अपने गाँव में इन प्रोडक्ट्स को लाने के लिए रवि को इन प्रोडक्ट्स को बनाने का प्रशिक्षण लेना और अभ्यास करना ज़रूरी था.तो इस कला को आत्मसाद करने के लिए रवि ने इस कला को सीखने की ठान ली.रवि ने कोयम्बतूर से 160 किलोमीटर दूर जाकर एक गाँव में बनाना फाइबर प्रोडक्ट्स बनाने का प्रशिक्षण लिया. हालांकि,शुरू में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.दक्षिण भारत की स्थानीय भाषा में पकड़ नहीं होने की वजह से उन्हें समझने में थोड़ी तकलीफ होती थी. लेकिन उन्होनें धीरज के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा किया और अपने गांव वापस आ गएँ.
“प्रधानमंत्री रोज़गार योजना” का मिला साथ, बन गएँ गाँव के सुपर हीरो
रवि अपने गाँव वापस आते ही कुशीनगर जिला उद्योग केंद्र गएँ और प्रधानमंत्री रोज़गार योजना की जानकारियाँ हासिल की. इसके बाद उन्होनें यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया से प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन योजना कार्यक्रम के तहत 5लाख रूपए का लोन लिया. व्यवसाय की रूप रेखा तैयार कर उन्होनें साल 2018 में अपने हेंडीक्राफ्ट व्यवसाय की शुरुआत कर दी.इस व्यवसाय में उनके आसपास के गाँवों से उन्हें काफी मात्रा में केले के पेड़ मिल जाते थे.इन्हीं से वो बैग,टोपी और कालीन बनाते थे.इसके साथ ही गाँव के किसान और आमजन जिन केले के छिलके और केले के पेड़ के बचे हुए भाग को कचड़े में डाल देते थे,उनका भी इस्तेमाल रवि ने किया.इससे उन्होनें रोज़गार का भी सृजन किया.
450 महिलाओं को मिला सम्मानित रोज़गार

साल 2018 में रवि ने सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत प्रदर्शनी लगाई थी. इससे कुशीनगर में उनकी एक अलग पहचान बन गयी.रवि ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.उन्होनें 450 महिलाओं को बनाना फाइबर से नया उत्पाद बनाना सिखाया.इससे महिलाओं को भी सम्मान का काम मिला और वो सशक्त हो पाई.जल्द ही AMAZON के ज़रिये भी रवि अपने प्रोडक्ट्स को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाएंगे.















