बिहार (Bihar) के मुंगेर (Munger) में स्थित जमालपुर रेल कारखाना (Jamalpur Rail Karkhana) परिसर में अवस्थित भारतीय रेलवे यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान इरिमी को आज 95 साल पूरे हो गए हैं। इस संस्थान का इतिहास अपने आप में स्वर्णिम रहा है। इसकी कहानी भारतीय रेलवे (Indian Railway) को आज इस ऊंचाई पर ले जाने में अहम रोल अदा करती है। इस संस्थान ने भारतीय रेलवे को अब तक कई ऐसे अधिकारी दिए, जो रेलवे को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में सारथी साबित हुए। अंग्रेजी शासनकाल से इस रेल परिचालन में सहायता प्रदान करने के लिए साल 1927 में एसजीआरए ने इसकी स्थापना की थी, जिसने भारतीय रेलवे को सशक्ति बनाया।
‘इरिमि’ 95 साल का हुआ
भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान इरिमी की आज 95वीं वर्षगांठ है, जिसका आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया है। इस रेल समारोह में कई बड़े रेल अधिकारियों के साथ-साथ कई रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। आज भारतीय रेलवे को नई दिशा देने और सुचारू रूप से पटरी का परिचालन करने के लिए भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान इरिमी की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि आज देश जमालपुर में स्थित सर्वोत्तम और सबसे बड़ी संस्था इरिमी की वर्षगांठ इतनी धूमधाम से मना रहा है।
इरिमी के वार्षिक समारोह पर हर साल देशभर की निगाहें टिकी रहती है। यह वार्षिकोत्सव और रेल कारखाना जमालपुर का वार्षिक निरीक्षण 14 फरवरी को पूर्व रेलवे कोलकाता के नए जीएम अरुण अरोड़ा आज करने वाले थे, लेकिन अचानक से उनका यह कार्यक्रम किसी वजह से रद्द हो गया।
क्या है ‘इरिमी’ की इतिहास
बता दे इरिमी की स्थापना साल 1888 में एक तकनीकी स्कूल के तौर पर की गई थी, जहां साल 1927 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की गई। इसके बाद यहां मैकेनिकल अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा। 1987 में शुरू किए गए इसके स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिस का एक पाठ्यक्रम पढ़ाया गया, जिसके उम्मीदवारों का चयन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भारतीय रेलवे मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के स्नातक यानी ग्रेजुएशन के लिए किया गया। रेलवे ने साल 2015 में इसे बंद कर दिया था, जिसे पुन: शुरुआत करने की लगातार मांग उठ रही है।