Gold-Silver Price Today: दिवाली से एक हफ्ता पहले ही त्योहारी सीजन की शुरुआत हो गई है। ऐसे में सोना चांदी खरीदने के लिए लोग भारी तादाद में बाजारों में पहुंच रहे हैं। धनतेरस के मौके पर सोना-चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। यही वजह है कि लोग धनतेरस और दिवाली के मौके पर सोना खरीदना पसंद करते हैं। ऐसे में अगर आप भी सोना खरीदने की प्लानिंग इस हफ्ते कर रहे हैं, तो कुछ बातों का खास तौर पर ध्यान रखें वरना आप ठगी का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में आइए हम आपको बताएं कि सोना खरीदते समय किन खास बातों का ध्यान रखना चाहिए…
सोना-चांदी खरीदते समय कुछ बातों का रखें खास ध्यान
- जब भी सोने-चांदी के गहने या बिस्कुट जैसी कोई भी चीज खरीदें, तो उसका भी एसआई हॉलमार्क चेक करना गलती से भी ना भूलें।
- इन आइटम्स पर उनकी शुद्धता के बारे में जानकारी जरूर अंकित होती है। इसे चेक करना बिल्कुल ना भूलें, क्योंकि हॉलमार्क वाली ज्वेलरी प्रमाणित होती है।
- ध्यान रखें कि दुकानदार कम रेट में बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी भी आपको जरूर दिखाएंगे, लेकिन ऐसी ज्वेलरी खरीदने से जरूर बचें क्योंकि इनकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती है।
- बता दे बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी कभी-कभी 70 परसेंट ही शुद्ध होती है। ऐसे में अगर आप बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदते हैं, तो आप को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
- सोने के चांदी के सिक्के को खरीदते समय जीएसटी वाला पक्का बिल लेना बिल्कुल ना भूलें। आपका पक्का बिल ही उसकी शुद्धता का दावा है।
- कम कीमत के लालच में कम कैरेट वाले गोल्ड के सिक्के या चांदी के कॉइन को बिल्कुल ना खरीदें।
- सोना 24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक आता है, इसलिए जो भी सोना ले रहे हैं उस पर लगी सील पर उसके रेट की जानकारी जरूर जांच लें। कई बार 22 कैरेट बताकर आपको 18 कैरेट का सोना दे दिया जाता है। ऐसे में आपको नुकसान झेलना पड़ सकता है।
- इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक देश भर में 14 सेंटरों से सोना-चांदी के करंट रेट लेकर औसत मूल्य तक सब बताया जाता है। ऐसे में आप खरीदारी से पहले एक बार इसे जरूर जांच लें।
- बता दे हर राज्य में सोने-चांदी के अलग-अलग भाव होते हैं। ऐसे में आप खरीददारी से पहले अपने राज्य के सोने चांदी के भाव जरूर जांच लें।
क्या होता है HUID नंबर?
बता दे किसी भी आभूषण पर दिया जाने वाला HUID नंबर एक अद्वितीय छह अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक कोड है, जो हर ज्वैलरी पर दिया जाता है। दरअसल सोने के आभूषणों की बिक्री में फर्जीवाड़े से बचने के लिए केंद्र ने बीते साल हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया था। ऐसे में हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेचने के लिए ज्वेलर्स को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके जरिये ठगी के मामलों में तेजी से गिरावट आई है।