इस बदलती दुनिया में आज इंसान भले ही वफादार नहीं रह गया गया है लेकिन आज भी बेजुबान जानवर की वफादारी के किस्से खूब सुनने को मिलते हैं. ऐसे ही बिहार के हाथी काका की कहानी है जिसे सुनकर आपकी आंखें डबडबा जाएँगी लेकिन फिर भी दिल हिम्मत से भर जाएगा। उनकी दास्तां किसी फिल्मों से कम नहीं है। उन्होंने जो किया और जो उन्होने सख्त फैसले लिए इससे पूरे देश में लोगों को ताज्जुब में डाल दिया। लेकिन इसके पीछे की कहानी निश्चित तौर पर आपको भावुक कर देगी।
राजधानी पटना से सटे दानापुर के जानीपुर इलाके में अख्तर इमाम अपनी पत्नी और दो हाथियों के साथ रहते हैं। उनका पूरा दिन हाथियों के साथ ही व्यतीत होता है। कहते हैं कि वृद्धावस्था इंसान को हमेशा अकेलापन का एहसास कराता है लेकिन अख्तर इमाम को बिलकुल भी ऐसा एहसास नहीं होता। आज उनके पशु प्रेम की चर्चा अब दूर दूर तक होने लगी है क्योकि 9 माह पूर्व उन्होंने अपने एकलौते नालायक बेटे को अपनी साऱी संपत्ति से बेदलखल कर दिया और अपने हिस्से की सारी संपत्ति अपने दो हाथियों के नाम कर दी।
अख्तर इमाम को अपने पुत्र से ज्यादा हाथी पर यकीन है। वे खुद को बिलकुल भी बेसहारा नहीं महसूस करते। उनके पशु प्रेम को देखते हुए वे “हाथी काका” के नाम से मशहूर हो गए हैं। अख्तर इमाम के पास दो हाथी है, एक का नाम रानी है और एक का नाम मोती । सुबह से रात का वक्त उनका इन्हीं के साथ गुजरता है। उन्होंने दोनों हाथियों के नाम पांच करोड़ की जमीन जायदाद को राजिस्ट्री कर दिया और अपने इकलौते नालायक बेटे को घर से बेदखल कर दिया।
अपने हिस्से संपत्ति की हाथी के नाम
अख्तर इमाम के जायदाद की रजिस्ट्री दो भागों में की गयी है, जिसमे आधा हिस्सा उनकी पत्नी के नाम है। लेकिन उन्होंने अपने हिस्से की संपत्ति मकान से लेकर बैंक बैलेंस और खेत खलिहान सबकुछ अपने दो हाथियों के नाम कर दी है और वे अब बेहद खुश हैं। वे कहते हैं कि अगर हाथियों को कुछ हो भी गया तो उनकी ये सारे प्रॉपर्टी ऐरावत संस्था को मिल जायेगी। क्योंकि वे खुद ऐरावत संस्था के संरक्षक भी हैं। अख्तर स्पष्ट शब्दों में कहते है कि उनका सारा जीवन हाथियों के लिये समर्पित है जीना इसी के लिये और मरना इसी के लिये, यही उनका साथी है।
‘बेटा ने फसाया हाथी बचाया’
अपने बेटे के बारे में बताते हुए कहते है कि उसने उन्हें अपनी प्रेमिका के साथ झूठे केस में फंसा दिया जिसके कारण उन्हें जेल तक जाना पड़ा लेकिन जांच के बाद आरोप झूठा निकला और वे बरी हो गए। उनके बेटे ने उनके हाथियों को जान से भी मारने की कोशिश की लेकिन पकड़ा गया। जिसके बाद उन्होंने दिल पर पत्थर रखकर ये कठोर फैसला लिया। हाथी के बारे में बताते हुए अख्तर कहते है कि एक बार जब हथियारबंद अपराधी रात ने घुस गए थे और उनकी जान लेने पर तुले थे तो हाथियों ने शोर मचा मचा कर लोगों को इकठ्ठा कर लिया था और उनके जान की हिफाजत की थी।