नोएडा: सुपरटेक के दो 40 मंज़िला इमारत गिराये जाएगे, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

Written by: Manish Kumar | biharivoice.com • 31 अगस्त 2021, 4:44 अपराह्न

नोएडा में स्थित रियल स्टेट कंपनी के सुपरटेक (Supertechs) को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस वे स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के दो टॉवरों 16 और 17 को अवैध करार देते हुए दोनों 40 मंजिला टॉवरों को गिराने का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक अगले तीन महीने में इन्हें गिराने का काम पूरा कर लेना है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाया और कहा कि बिल्डर और अथॉरिटी मिलकर कानून के विपरीत काम कर रहे हैं। दौलत के जोश मे बिल्डर वैधानिक नियमोें का उलंघन कर रहे हैं। नोएडा में गैर कानूनी अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बनी हुई है और ये गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन बिल्डर और अथॉरिटी के ऑफिसर के गठजोड़ की बदौलत है।

अब जिन खरीदारो ने इस कंस्ट्रक्शन कंपनी से फ्लैट खरीदा था और इसके लिए कंपनी के पास पैसे जमा कराए हुए थे, कोर्ट की तरफ से कम्पनी को ऐसे सभी खरीदारों को ब्याज सहित पैसे वापस करने का आदेश दिया है। कोर्ट की तरफ से आदेश मे कहा गया कि ” फ्लैट मालिकों को दो महीने में पैसा ब्याज सहित पैसा वापस करना होगा 12 परसेंट सालाना का ब्याज देना होगा”।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस वे स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के टॉवर-16 और 17 को अवैध ठहराया और कहा कि Emarald Court सोसाइटी में दो टॉवर नियमों का उल्लंघन करके निर्मित किए गए हैं। बता दें कि इन टॉवर में 950 फ्लैट हैं। एक टॉवर 42 मंजिल का है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नक्शा पास होने के वक्त ये दोनों टॉवर अप्रूव नहीं हुए थे। बाद में नियमों का उल्लंघन करके इन टॉवर का निर्माण कराया गया।

दो करोड़ रुपये का हर्जाना

सुपरटेक निर्माण को अवैध घोषित करते हुए सुपरटेक सोसाइटी पर दो करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया गया है। कम्पनी को हर्जाने की यह राशि आरडब्लूओ को देनी होगी। दोनों टॉवरों को गिराने का खर्च सुपरटेक को वहन करना होगा। कोर्ट ने इन्हें 3 महीने में गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि टॉवर्स को गिराते वक्त अन्य भवनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह द्वारा इस मामले की सुनवाई की गई।

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Manish Kumar

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