किराएदार अगर खाली नहीं करता है मकान तो भरना होगा चार गुना ज्यादा किराया, जानिए इससे जुड़ा नियम

House Rent Rules In India: भारत में अभी के समय में किराए पर अधिक लोग रहते हैं. लोग अपने रोजी-रोटी के तलाश में किराए पर मकान लेते हैं. हालांकि कई बार ऐसा होता है कि मलिक के बार-बार कहने पर भी लोग मकान खाली नहीं करते हैं और विवाद खड़े हो जाते हैं. इन्ही विवादों से निपटने के लिए सरकार ने मकान मालिक और किराएदार को लेकर कुछ कानून बनाए हैं जो उनके अधिकारों की रक्षा करता है.

इसके साथ ही साथ कानून किराएदार को अनुचित किराया चुकाने से भी बचाता है. मकान मालिक को और किरायेदारों दोनों के हितों को संतुलित करने और उनकी रक्षा करने के लिए 1948 में एक किराया नियंत्रण अधिनियम पारित किया गया था. हर राज्य का अपना अलग-अलग किराया नियंत्रण अधिनियम होता है. हालांकि इसके नियम सभी राज्यों के लिए एक जैसे ही है.

किराएदार के कमरा खाली नहीं करने पर क्या है नियम (House Rent Rules In India)

नियम के अनुसार अगर कोई किरायेदार किसी मकान का किराया नहीं दे रहा है, और मकान मालिक के बार-बार कहने पर घर खाली नहीं कर रहा है तो ऐसे में उसे बढ़ा हुआ किराया देने के लिए उत्तरदाई माना जाएगा. अगर कांटेक्ट खत्म हो गया है और उसको रिन्यू नहीं कराया जाता है तो किराएदार को बढ़ा हुआ किराया देना होगा.

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जानिए कितना देना होगा किराएदार को किराया

इस नियम के अनुसार यह बढ़ा हुआ किराया किराएदार को पहले 2 महीने के लिए किराए के दोगुना और उसके चार गुना तक देना होता है. लेकिन अगर इस बीच वह कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू कर लेता है तो उसे अतिरिक्त किराया जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

इस कंडीशन में दिया जाता है छूट

इसके अलावा अगर किराएदार के साथ या उसके परिवार में कोई आप अप्रत्याशित घटना हो जाती है तो ऐसी स्थिति में मकान मालिक को घटना की समाप्ति की तारीख से 1 महीने की अवधि के लिए परिसर में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए. वही मकान मालिक के ऊपर निर्भर करता है वह चाहे तो किराया माफ कर सकता है.

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